Palitana 5 Chaityavandan In Hindi Full 2021 -
2. शांतिनाथ भगवान (Shanthi Nath Bhagwan) - दूसरी चैत्यवंदन
शांति जिनेश्वर सोळमा, अचिर सुत वंदो;विश्वसेन कुल नभोमणि, भविजन सुख कंदो।मृग लांछन जिन ओखणुं, लाख वरस प्रमाण;हस्तिनापुर नगरी धणी, प्रभुजी गुण मणिखाण।चालीश धनुषनी देहड़ी, समचोरस संस्थान;वदन पद्म ज्युं चांदलो, दीठे परम कल्याण।
चैत्यवंदन का अर्थ है 'जिनालय (मंदिर) में स्थित जिनेन्द्र देव की वंदना करना'। यह एक विशेष पूजन विधि है, जिसमें अर्हंत (तीर्थंकर) और सिद्ध भगवान की स्तुति की जाती है।
(पुंडरीक स्वामी का स्तवन गाएं) palitana 5 chaityavandan in hindi full
यह आदिनाथ भगवान के प्राचीन चरण पादुका (रायण वृक्ष के नीचे) के पास किया जाता है।
तृतीय चैत्य — तप का अभिवादन तृतीय चैत्य को नमन, तप-बल का अनंत स्वरूप। त्याग और संयम के पथ पर चलकर मिलती मुक्ति सुफल रूप॥ ॐ नमो तपोवनाय
विमल सुजस जग प्रगट कीनो, सिद्ध अनंता ध्यान ही दीनो।शत्रुंजय गिरिवर सुखकारी, वंदूं चरण कमल बलिहारी। अचिर सुत वंदो
The Palitana 5 Chaityavandan is a sacred sequence of prayers performed by Jain pilgrims at Shatrunjaya Hill. Each "Chaityavandan" is a specific ritual of devotion involving physical posture, meditation, and chanting to honor the Tirthankaras.
"जंकिंचि सूत्र जंकिंचि नाम तित्थं सग्गे पायालि माणुसे लोए। जाइं जिणबिंबाइं ताई सव्वाइं वंदामि॥ नमोत्थुणं सूत्र नमोत्थुणं अरिहंताणं भगवंताणं॥"
1. जय तलेटी (Jay Taleti) - पहली चैत्यवंदन विश्वसेन कुल नभोमणि
2. द्वितीय चैत्यवंदन: पुण्डरीक स्वामी (Pundarik Swami)
पालीताणा ५ चैत्यवंदन एक अद्वितीय वास्तुकला का उदाहरण है, जो जैन धर्म की समृद्ध संस्कृति और इतिहास को दर्शाता है। इस तीर्थ स्थल की कुछ विशेषताएं इस प्रकार हैं: